सफलता की प्रसन्नता (Happiness of Success)Hindi pdf,पुस्तक समीक्षा

सफलता की प्रसन्नता (Happiness of Success) Orison Swett Marden की चमत्कारिक रचना है। इस पुस्तक में मार्डन साफ शब्दों में कहते है, युवा पीढ़ी के लिए की आपको किसी भी परिस्थिति में निराशा नही होना है, ,क्योंकि आप जितनी बार आप निराश होते है, आप अपने द्वारा तैयार की गई इमारत को आप खुद अपनी हाथों ध्वस्त करते हैं। दूसरे शब्दो में कहे तो आप जितनी बार निराश होते है, आप उतनी बार अपने द्वारा की गई परिश्रम को नुकसान पहुंचाते है।

कम निवेश और कम जगह में मशरूम की खेती से सालाना 10 लाख की कमाई!

जी हां दोस्तो आप सही पढ़ रहे है, बहुत कम निवेश और कम जगह में आप मशरूम की खेती से सालाना 10 लाख तक कमा सकते है। अगर आप घर पर रहते हुए रोजगार करना चाह रहे है, या वर्तमान रोजगार से संतुष्ट नहीं है, तो आप घर पर मशरूम की खेती कर सकते है

अरावलीपर्वतमाला/ARAVALI HILLS/ गुजरात से रायसीना तक का सफर

ARAVALI HILLS; RAJSTHAN अरावली पर्वतमाला एक अवशिष्ट पर्वत का उदाहरण है, जिसकी कुल लंबाई गुजरात के पालनपुर से दिल्ली तक लगभग 692 किलोमीटर है। अरावली पर्वतमाला का लगभग 79.49% विस्तार राजस्थान में है। क्या आप जानते है, दिल्ली में बना राष्ट्रपति भवन किस पहाड़ श्रृंखला का भाग है? क्या आप जानते है, अरावली पर्वतमाला भारत के किन–किन राज्य से होकर गुजरती है? तो आइए हम अरावली प्राचीनतम पर्वतमाला के बारे में विस्तृत जानते है। अरावली पर्वतमाला की विशेषताएं राजस्थान राज्य के पूर्वोत्तर क्षेत्र से गुजरती 692 किलोमीटर लंबी इस पर्वतमाला का कुछ चट्टानी पहाड़िया दिल्ली के दक्षिणी हिस्से तक चली गई है। अरावली पर्वतमाला दिल्ली के पास से शुरू होती है उसके बाद दक्षिण हरियाणा और राजस्थान से गुजरती है और गुजरात में समाप्त होती है। इस पर्वतमाला की सहायता से उत्तर पश्चिम दिशा से होने वाली विदेशी आक्रमणों को रोका गया था यह पहाड़ महाराणा प्रताप की वीरता और उपलब्धियों उनकी कर्मभूमि का साक्षी है। प्रसिद्धि हल्दीघाटी अरावली पर्वत श्रृंखला में ही स्थित है। इस पर्वत का प्राचीन संस्कृत नाम “परियात्रा” था, जिसकी गिनती कुल सात पहाड़ों में होती है। अरावली पर्वत श्रृंखला को तीन भागों में विभक्त है, 1.    दक्षिणी अरावली पर्वत श्रृंखला 2.    मध्य अरावली पर्वत श्रृंखला 3.    उत्तरी अरावली पर्वत श्रृंखला  दक्षिणी अरावली पर्वतमाला इस पर्वतमाला के अंतर्गत राजस्थान राज्य के सिरोही, राजमंद, और उदयपुर जिले आते है। इसमें सिरोही जिले में  माउंट आबू क्षेत्र में स्थित गुरु शिखर पर्वत जिसकी ऊंचाई 1722 मीटर है, सर्वोच्च पर्वत श्रृंखला है। दक्षिणी अरावली पर्वतमाला के अन्य प्रमुख पर्वत चोटियां है, ●     सेर (1597मीटर) ●     अचलगढ़ (1380 मीटर) ●     देलवड़ा (1442 मीटर) ●     आबू (1295 मीटर ) ●     ऋषिकेश (1017 मीटर) मध्य अरावली पर्वत श्रृंखला  यह पर्वतमाला का ज्यादा भाग राजस्थान जिले के अजमेर में फैला हुआ है। इस इस क्षेत्र में पर्वत सिंह कला के साथ संकीर्ण घाटियों के साथ साथ  समतल स्थल भी स्थित है। उतरी अरावली पर्वतमाला इस पर्वत श्रृंखला का विस्तार जयपुर, दौसा, तथा अलवर जिले में है। इस क्षेत्र में पहाड़ियों की उच्च शिखर है, ●      सीकर जिले में रघुनाथ गढ़ (1055 मीटर) ●     अलवर में बैराठ (792 मीटर) ●     जयपुर में खो (920 मीटर) अरावली पर्वतमाला में स्थित समृद्ध जैव विविधता अरावली की पहाड़ियां हिमालय पर्वत से भी पुरानी है, ये पहाड़िया न सिर्फ थार मरुस्थल को फैलने से रोकती है, बल्कि भूजल को फिर से जमीन में रिचार्ज करती है। इसके अलावा यहां जैव विविधता का भंडार है, इन पहाड़ियों के जंगलों में 20 पशु अभयारण्य है। माउंट आबू पर्वत राजस्थान का शिमला अरावली पर्वत श्रृंखला के सिरोही जिले में माउंट आबू पर्वत पर्यटन के लिहाज से राजस्थान का एकमात्र हिल स्टेशन है। रोमांचक रास्ते, मनमोहक जिले, उत्तम पिकनिक स्पॉट और सर्द मौसम माउंट आबू को पसंदीदा पर्यटन स्थल बनाता है, इस हिल स्टेशन पर हनीमून डेस्टिनेशन और सनसेट प्वाइंट लोकप्रिय है। यह हिल स्टेशन 22 किलोमीटर लंबे और 9 किलोमीटर चौरे पथरीले पठार पर बसा हुआ है। जिसे राजस्थान का शिमला के उपनाम से भी जाना जाता है। राजस्थान के सिरोही जिले में स्थित अरावली की पहाड़ियां की प्राकृतिक खूबसूरती सैलानियों को अपनी ओर आकर्षित करती है। यहां मनोरम वादियां सैलानियों को मंत्रमुग्ध कर देती है। यह अरावली पर्वत का सर्वोच्च शिखर,  जैन धर्मावलंबी वाले लोगो का परमुख तीर्थ स्थल है। अरावली पर्वतमाला से संबंधित अक्सर पूछे जाने वाली सवाल जवाब? Q 1. अरावली पर्वतमाला के पास कौन सी जनजाति निवास करती है? Ans; अरावली पर्वतमाला के पास सदियों से भील जनजाति निवास करती है। Q 2. अरावली पर्वत श्रृंखला को बीच में से विभाजित करने वाली कौन सी नदी प्रणाली है? Ans; अरावली पर्वत का पश्चिमी भाग मारवाड़ एवं पूर्वी भाग मेवाड़ कहलाता है। यहां पर अनेक प्रमुख नदियां जैसे बनास, लूनी, साखी एवं साबरमती नदी का उदगम स्थल है। Q 3. अरावली पर्वतमाला (Aravali hills rajasthan) का विस्तार सबसे ज्यादा किस जिले में है? Ans; उदयपुर Q 4. अरावली पर्वतमाला (Aravali hills rajasthan) का कितना प्रतिशत भाग राजस्थान में है? ANS; अरावली पर्वतमाला का लगभग 80% भाग राजस्थान के विभिन्न जिलों में है। इस पर्वतमाला का विस्तार गुजरात से दिल्ली तक लगभग 692 किलोमीटर तक है। दिल्ली में दिल्ली में स्थित राष्ट्रपति भवन रायसीना की पहाड़ी पर बना हुआ है जो अरावली पर्वत श्रृंखला का ही भाग है। Q 5.  अरावली पर्वतमाला राजस्थान के कितने जिलों में विस्तृत हुई है? Ans;  अरावली पर्वत श्रृंखला मुख्य रूप से राजस्थान में फैली हुई है। यह राजस्थान के कम से कम 7 जिलों और अधिकतम 13 जिलों में इसका विस्तार है।

जीवन के 365 सबक जिन्दगी को नए आयाम देने वाली चमत्कारिक पुस्तक

लेख़क; रघुवेंद्र रमन अरोड़ा जीवन प्रबंधन सब के लिए एक समान नहीं होते है, किसी के जीवन बहुत सरल होता है, उनको विरासत में सभी ऐश- आराम बड़ी सुगमता से प्राप्त हो जाते है, उनको विषम परिस्थितियों का संज्ञान ही नही होता है, उनको यह भी पता नहीं होता है, दुनिया में ऐसे लोग है, … Read more

मुख्यमंत्री युवा उद्यमी योजना तक मिलेंगे 10 लाख रुपये तक लोन

आज मैं बिहार के बिहार के युवाओं के बीच मुख्यमंत्री बिहार सरकार माननीय नीतीश कुमार द्वारा  स्वरोजगार और उद्यमिता को बढ़ावा देने के लिए चलाई जाने वाली युवा उद्यमी योजना का लाभ/ योग्यता एवं पात्रता के बारे में  बताने जा रहा हूं।

सुधा और चंदर का कभी नही टूटने वाला अनंत प्रेम गाथा

पुस्तक समीक्षा गुनाहों का देवता  उपन्यास है, जो की लेखक धर्मवीर भारती द्वारा लिखा गया है। धर्मवीर भारती बहुमुखी प्रतिभा के लेखक थे। कविता, कहानी, उपन्यास, आलोचना, अनुवाद, नाटक, आदि विधाओं में उनको महारत हासिल थी, बाल्यावस्था में पिता की मृत्यु इलाहाबाद की संस्कार से बचपन से ही परिपक्व हो गए थे। गुनाहों का देवता … Read more

वैशाली के दर्शनीय स्थल

वैशाली को गणराज्य के रूप में 6 वी शताब्दी इसवी पूर्व तक गौतम बुद्ध तक के जन्म से पहले 563 में स्थापित किया गया था, जिससे यह विश्व का पहला गणतंत्र बना। वैशाली में अनेक ऐतिहासिक दर्शनीय स्थल है, जिसको जानने के लिए और देखने के लिए विदेशी सैलानी भी आते है। पिछले जैन ” … Read more